कोरोना से बचाव

  


फिर कोरोना से कैसे बचे






जो लोग यह मान चुके हैं कि कोरोना एक बुरा सपना था और अब यह सपना खत्‍म हो चुका है, ऐसे लोगों के लिए बुरी खबर है। एक ओर, डॉ. माइकल रयान, विश्व स्वास्थ्य संगठन के आपात कार्यक्रमों के निदेशक (executive director of the World Health Organization's Health Emergencies Programme), कह रहे हैं:

''जो लोग भी ऐसा सोच रहे हैं कि कोरोना वायरस अब लगभग खत्म हो गया है या फिर कुछ ही महीनों में दुनिया को इससे छुटकारा मिल जाएगा, उन्हें मैं सावधान करना चाहता हूँ कि आप भ्रम में जी रहे हैं और समय से पहले किसी भी चीज के होने के बारे में अत्‍यंत आशावादी सोच रख रहे हैं। हालांकि हम कोरोना वायरस वैक्सीन की वजह से कोविड-19 की कड़ी को तोड़ सकते हैं और इससे होने वाली मौतों पर भी नियंत्रण लगाया जा सकता है।''

भविष्‍य के गर्भ में क्‍या छिपा है, ईश्‍वर ही जाने, परंतु कोरोना महामारी के डर से माता-पिता अपने बच्‍चों की गतिविधियों को सीमित कर रहे हैं, विद्यालय बंद पड़े हैं, भले ही घर हो, पड़ोस हो, अथवा अन्‍य कोई भी स्‍थान — शारीरिक दूरी बनाए रखने के लिए उन्‍हें चारों ओर बाध्‍य किया जा रहा है, महामारी का भय सभी को आतंकित करते हुए चारों ओर फैला है। स्‍वाभाविकता कहीं खो गई है, परिणामस्‍वरूप, न केवल बच्‍चों के शारीरिक स्‍वास्‍थ्‍य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है, साथ ही साथ मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य भी उनका साथ छोड़ रहा है।

शारीरिक और मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य के लिए और विकास की राह पर अग्रसर बने रहने के लिए, स्‍वाभाविक और सहज बने रहना अत्‍यंत आवश्‍यक है, परंतु कोरोना महामारी ने ऐसी विकट परिस्थितियाँ उत्‍पन्‍न कर दी हैं कि हम सब स्‍वयं को नकारात्‍मक भावों; जैसे—तनाव, घबराहट, क्रोध, कुंठा और निराशा आदि में घिरता हुआ देखने को विवश हैं।

एक झटके में इस परिस्थिति से निकलना तो संभव नहीं है, परंतु यदि सही मानसिकता और दृष्टिकोण अपनाया जाए और नीचे दी गई पाँच युक्तियाँ अपनाई जाएँ, तो इस महामारी की कठिनता को कम अवश्‍य किया जा सकता है और नई परिस्थितियों को अनुकूल बनाकर अपने मन और शरीर को रोगों और समस्‍याओं से बचाया जा सकता है:

1दिनचर्या निश्चित करें

इस विपत्ति के समय जीवन पहले ही लगभग अनिश्चित रूप ले चुका है और यदि इस समय नियमित दिनचर्या बनाकर उसका पालन नहीं किया जाएगा, तो ऐसा करना समस्‍या को और अधिक बढ़ा देगा। दिन को समान भागों में बाँटें और सभी भागों में ऐसे कार्य रखें, जो सरलता से किए भी जा सकें। ऐसे आप प्रत्‍येक कार्य पर अधिक ध्‍यान केंद्रित कर सकेंगे और तनाव में भी नहीं घिरेंगे।

2सुरक्षा उपायों का पालन करें

यह सच है कि इस काल में "हर ओर यह मत करो, वह मत करो" का शोर सुनाई दे रहा है, परंतु यह सब अंत में हमारे ही भले के लिए है। सभी सुरक्षा उपाय — चाहे वह मास्‍क लगाना हो, शारीरिक दूरी बनाए रखना हो, अथवा किसी से मिलकर अथवा कहीं से आकर हाथ धोना हो आदि — आपको और आपके परिवार को महामारी से सुरक्षित करते हैं।

3टीवी, इंटरनैट आदि से दूरी बनाएँ

टीवी अथवा इंटरनैट का प्रयोग बुरा नहीं है, परंतु कई बार इन पर प्रसारित की जा रही सामग्री भ्रामक भी हो सकती है, कई बार कुछ social sites पर publish की गई सामग्री गलत पाई जाती है, इन्‍हीं सब कारणों से सलाह दी जाती है कि इस महामारी के काल में टीवी अथवा इंटरनैट आदि से दूरी बनाएँ।

4तनाव आदि से दूर रहें

तनाव आदि समस्‍याओं से मुक्ति पाने के लिए तनाव प्रबंधन बहुत महत्‍वपूर्ण है। तनावग्रस्‍त बच्‍चों में अनिद्रा या अधिक नींद आना, अधिक या कम खाना, बेचैनी, थकान, ऊर्जा और उत्साह की कमी होना, मितली आना, पेटदर्द अथवा व्‍यवहार में परिवर्तन आदि लक्षण मिल सकते हैं।

यदि तनावग्रस्‍त हैं और चिंतित हैं, तो शांत होने के लिए गहरी और धीमी सांस लें, कुछ ऐसा करें, जो आप पसंद करते हों, कोई पसंदीदा गीत सुनें, यदि पसंद हो, तो नृत्‍य आदि करें, किसी मित्र आदि से बात करें। अपना मन तनाव बढ़ाने वाले विषय से हटाएँ।

5अपनी भावनाएँ व्‍यक्‍त करें

अपनी भावनाओं और विचारों के बारे में बात करना आपको अपने ही बारे में और अधिक समझने में सहायता करता है। किसी ऐसे व्‍यक्ति से बात करना जो आपकी ही स्थिति में हो, या समान परिस्थिति से निकल चुका हो, आपको समस्‍या के अधिक से अधिक पहलुओं पर विचार करने में सहायता करता है। कई बार भावनाएँ यदि व्‍यक्त न की जाएँ, तो वह मानसिक रोगों को भी जन्‍म दे सकती हैं। तो माता-पिता, भाई-बहन, किसी करीबी और दोस्‍त आदि से अपनी भावनाएँ साझा अवश्‍य करे

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