होली का त्यौहार/ खुशी व मिलन का अवसर

नमस्कार मित्रों ! आपका स्वागत है हमारे इस आर्टिकल में जहां हम आपको होली का त्यौहार के इस आर्टिकल में होली से जुड़ी जानकारी देने वाले हैं। हम सभी को साल की शुरुआती महीने से ही होली का इंतजार रहता है। बता दें कि जिन लोगों को होली के विषय में अधिक जानकारी नहीं है, वे लोग इसके बारे में जानने के लिए भी बेताब रहते हैं। तो यह आर्टिकल उन्हीं लोगों के लिए है क्योंकि इसके अंतर्गत हमने बताया है कि होली कब मनाया जाता है?,होली क्यों मनाया जाता है?और होली कैसे मनाया जाता है? आदि के बारे में। इसके साथ ही हम यहां आपको होली की कथा से भी अवगत करवाने वाले हैं। तो आइए बिना देर किए जानते हैं होली के बारे में पूरी जानकारी –




 

होली का त्यौहार क्या है?




होली का त्यौहार सभी के लिए खुशियों का दिन होता है, खासकर बच्चों के लिए। बता दें कि इस त्यौहार के दिन बच्चे रंग-गुलाल खेलना काफी पसंद करते हैं। इस त्यौहार का इंतजार बच्चे से लेकर बड़े तक करते हैं। यह बच्चों के लिए काफी उत्साह का दिन होता है। इसमें कई प्रकार के स्वादिष्ट भोजन सभी घरों में  बनाए जाते हैं।

इस त्यौहार की ऐसी मान्यता है कि इस दिन लोगों को अपने पुराने सभी झगड़ों और मनमुटाव को भुलाकर एक नई शुरुआत करनी चाहिए और दोस्ती का हाथ बढ़ाना चाहिए। इस त्यौहार का उद्देश्य अहंकार पर आस्था तथा विश्वास पर जीत होना है। इसी कारण यह पर्व हर्षोल्लास से मनाया जाता है।

 

होली कब मनाया जाता है?




होली का त्यौहार प्रत्येक वर्ष वसंत ऋतु में हमारे भारत में हिंदू पंचांग के मुताबिक फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। अंग्रेजी महीनों के अनुसार हम होली का त्यौहार मार्च के महीने में मनाते हैं। बसंत पंचमी के दिन से ही इस त्यौहार की शुरुआत हो जाती है।

 

होली की कथा क्या है?




होली का त्यौहारमनाने के पीछे की एक कथा है, जो हिरण्यकश्यप नाम के एक राक्षस से जुड़ी हुई है। हिरण्यकश्यप के घर प्रह्लाद नाम के एक पुत्र ने जन्म लिया, जो भगवान विष्णु का परम भक्त था एवं दिन प्रतिदिन उनकी पूजा-अर्चना करता था लेकिन हिरण्यकश्यप भगवान विष्णु का पूर्ण विरोधी था एवं अपने पुत्र प्रह्लाद को उनके पूजा करने से रोकता था।

हिरण्यकश्यप ने डांट कर, धमका कर सभी कोशिश कर ली लेकिन वह अपने पुत्र प्रह्लाद को भगवान विष्णु की पूजा करने से रोक न सका। इसके बाद वह साम-दाम-दंड-भेद लगाने पर उतर आया। हिरण्यकश्यप ने अंत में हार मानते हुए प्रह्लाद को मार डालने की कोशिश की लेकिन हर बार वह असफल होता गया। इसके बाद हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका को बुलाया और अपने पुत्र प्रह्लाद को मारने के लिए कह दिया।

होलिका को ईश्वर द्वारा यह वरदान प्राप्त था कि वह यदि कभी भी आग पर बैठेगी तो वह जल नहीं पाएगी। इसी के घमंड में होलिका ने भक्त प्रहलाद को अपनी गोद पर बिठा लिया और स्वयं आग पर बैठ गई लेकिन भक्त प्रह्लाद भगवान विष्णु की भक्ति में मग्न थे। फिर अचानक से भविष्यवाणी हुई और होलिका को याद दिलाया गया कि उसके वरदान में यह भी कहा गया था कि यदि उसने अपने शक्ति का गलत उपयोग किया तो वह उस आग में जलकर भस्म हो जाएगी। ठीक ऐसा ही हुआ। होलिका आग में जलकर भस्म हो गई और प्रह्लाद बच गए। इसी दिन से होली के त्यौहार की शुरुआत हुई और बुराई पर अच्छाई की जीत के जश्न में होली मनाई जाने लगी।

 

होली क्यों मनाया जाता है?




होली का त्यौहार एक लंबे समय से चलता आ रहा बेहद ही पवित्र एवं पौराणिक त्यौहार है। कई लोगों के मन में यह प्रश्न उठता है कि होलीक्यों मनाया जाता है? तो बता दें कि इस त्यौहार को मनाने के पीछे कई पौराणिक मान्यताएं हैं, जिसके कारण होली मनाया जाता है। जैसा कि हमने होली की कथा बताया, उसी के आधार पर भक्त प्रहलाद के बचने एवं बुराई पर अच्छाई की जीत के जश्न में होली का त्यौहार मनाया जाता है।

 

होली कैसे मनाया जाता है?



होली का त्यौहार पवित्र त्योहारों में से एक माना जाता है, जिसमें रंग और गुलाल लगाकर लोग एक दूसरे के साथ होली मनाते हैं। होली के दिन सभी के घर में पुए और पकवान बनाए जाते हैं एवं लोग नए नए कपड़े पहन कर शाम के समय निकलते हैं। शाम के समय लोग एक दूसरे को गुलाल लगाकर होली की ढेर सारी शुभकामनाएं देते हैं और एक दूसरे का मुंह मीठा करते हैं। इस दिन लोग एक दूसरे के घर जाकर भी उन्हें गुलाल लगाते हैं और आपस में हुए पुराने गिले-शिकवे को भूल कर एक नई शुरुआत करते हैं। होली के दिन बच्चे अपने से बड़ों को गुलाल लगाकर उनके आशीर्वाद लेते हैं।

होली के दिन बाजारों में विभिन्न तरह के रंग और गुलाल मिलते हैं, जिनका इस्तेमाल कर लोग एक-दूसरे को होली के रंग में रंग देते हैं और खूब मस्ती करते हैं। बता दें कि पहले के समय में होली पर इस्तेमाल किए जाने वाले रंगों को फूलों और विभिन्न प्राकृतिक पदार्थों का इस्तेमाल कर बनाया जाता था, जिन्हें गुलाल कहते हैं लेकिन आज के समय में होली के लिए बाजारों में जो रंग बिकते हैं, वे पूरी तरह से केमिकल के बने हुए पाउडर होते हैं। इनका इस्तेमाल करना हमारे त्वचा के लिए बेहद हानिकारक होता है। इसके कारण विभिन्न प्रकार की शारीरिक समस्याओं एवं रोगों से भी लोगों को जूझना पड़ सकता है। यदि आप रंग और गुलाल के साथ होली मनाना चाहते हैं, तो बाजारों में केमिकल वाले रंगों का इस्तेमाल करने के बजाए प्राकृतिक और ऑर्गेनिक गुलाल का इस्तेमाल कर होली मनाएं।




 

निष्कर्ष :

हम उम्मीद करते हैं कि आपको हमारा यह आर्टिकल पसंद आया होगा क्योंकि यहां हमने होली का त्यौहार के बारे में संपूर्ण जानकारी उपलब्ध करवाई है, जिसके माध्यम से आपको होली के बारे में अन्य नई जानकारी भी मिली होगी।  यहां उपलब्ध जानकारी के मुताबिक अब आप होली के त्यौहार के अंतर्गत इस बात से अवगत हो चुके होंगे कि होली कब मनाया जाता है? होली क्यों मनाया जाता है? और होली कैसे मनाया जाता है? इसके साथ ही हमने होली की कोई कथा भी आपको बताया है, जिससे आप पौराणिक मान्यताओं को लेकर होली के महत्व को समझ सकते हैं। यदि आपको यह आर्टिकल पसंद आई तो इसे अपने दोस्तों के साथ सोशल मीडिया पर जरूर शेयर करें और साथ ही अपना फीडबैक हमें कमेंट में जरूर बताएं।


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